पिछले कुछ हफ्तों में रिलीज हुई फिल्मों के बारे में बात की जाए तो बाहुबली और बजरंगी भाईजान ही मन को भाई है। लेकिन नाम तो इन दोनों फिल्मों के अलावा और भी कई फिल्मों का हुआ है। खैर फिल्म का नाम और उसका लोकप्रिय हो जाना अब फिल्म की कहानी के आधार पर तय नहीं होता बल्कि फिल्म के प्रमोशन और मार्केटिंग की योजनाओं पर तय होता है। फिल्म मसान को ही ले लीजिए। रिचा चड्ढा की इस फिल्म को न एक ओर जहां काम में लोगों ने स्टैंडिग ऑडीशन देकर सम्मानित किया वहीं सोशल मीडिया ने इसे इतना प्रमोट किया कि लोग सिनेमाघरों में फिल्म देखने खिंचे चले आए। लेकिन प्रेमी जोड़ों को हटा दिया जाए तो बिना कहानी वाली इस फिल्म ने आधे घंटे में ही लोगों को बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। ऐसी स्थिति में दर्शक खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। हालांकि यह हाल सिर्फ मसान का ही नहीं है बल्कि उन कई फिल्मों का है जिनके निर्मातानिर्देशक कहानी के बदले फिल्म के प्रमोशन और मार्केटिंग पर ज्यादा ध्यान देते हैं। इससे एक हद तक फिल्म पैसा तो कमा लेती है, लेकिन दर्शकों का भरोसा उसे नहीं मिल पाता।
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