महेश भट्ट को आज के सिनेमा का सबसे उदारवादी और संगर्ष शील फ़िल्मकार माना जाता है। कुछ समय पहले हिंदुस्तान के दफ्तर मे जज उनसे मिली तो उनका उदारपन भी देखा, लेकिन उनके एक इंटरव्यू ने मेरे मन मैं उनकी बसी तस्वीर को भर्मित कर दिया। अपने जीवन के उतार चढ़ाव मैं महेश अपनी बेटियों को तो अपने पास पाते हैं पर अपने बेटे राहुल को अभी भी खुद से दूर रखने का पछतावा है उन्हें। उनका कहना है कि राहुल के साथ मैंने ज्यादा बचपन नहीं गुजारा है। मैं घर से अलग हो गया था। वह मुझे बहुत याद करता था और शायद मुझसे गुस्सा भी था। जाहिर है अगर बाप उसकी मां को छोड़ कर किसी और औरत के साथ रहेगा तो उसे गुस्सा आएगा।मैंने भी उस वक़्त उसके दर्द को नजरअंदाज किया। और बाद मैं उस दर्द से उसे भर निकलने मैं मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी। ‘पाप’ की शूटिंग के दौरान हम बाप-बेटे एक कमरे में डेढ़ महीने ठहरे तो रिश्ता कायम हुआ। मैंने बताया भी कि मुझे अपने पिता से जो शिकायत थी,वही मैंने तुम्हारे साथ कर दिया।मुझे उस बात का बहुत पछतावा है,क्योंकि जो मुझ पर गुजरी थी वह मेरे बेटे पर नही गुजरनी चाहिए थी।
Sunday, 28 June 2015
संग्राम को सलमान की सलाह
इस हफ्ते रेसलर से सेलिब्रेटी बने संग्राम शिग से मिली। संग्राम को पहले इतने डिजाइनर कपड़ो मैं कभी नही देखा था। पूछने पर भी कहले लगे की मैंने कभी 1 लाख का सूट नही पहना पर अब मज़बूरी है। अब हीरो बन गया हु तो मज़बूरी है महंगे और चमकीले कपडे पहनना। वरना इतने पैसों का तो मैं अपने यहां कई बच्चों को पढ़ा देता। संग्राम की बाते सुनकर लगा की भले कोई कितना भी सीधा और शांत क्यों न हो। उसे बॉलीवुड की चमक धमक मैं खुद को बनाये रखने क लिए चमकना ही पड़ता है। वैसे संग्राम का कहना है की महंगे कपड़ो और स्टाइल मरने की शिक्षा उन्हें बॉलीवुड के एक मात्र भाई जान सलमान खान ने दी है।
सुपरस्टार नहीं सुपर टैलेंटेड स्टार से सजी मिस टनकपुर
http://www.livehindustan.com/news/entertainment/article1-director-vinod-kapdi-film-miss-tanakpur-hazir-ho-484567.html
इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर खबरों में सिर्फ निर्देशक विनोद कापड़ी की मिस टनकपुर की ही चर्चा है। फिल्म का प्रमोशन करने हिन्दुस्तान के दफ्तर आए विनोद ने मिस टनकपुर से जुड़ी कई दिलचस्प बातों का खुलासा किया। पेश है विनोद कापड़ी और उनकी मिस टनकपुर की टीम से की गई बातचीत के कुछ अंश।
यूट्यूब पर भले ही विनोद कापड़ी की फिल्म मिस टनकपुर को अच्छा रिस्पॉन्स मिला हो, लेकिन फिल्म में किसी सुपरस्टार के न होने से विनोद को शुरुआती दिनों में काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। विनोद कापड़ी का कहना है कि बॉलीवुड में एक निर्माता-निर्देशक के लिए फिल्म बनाना तो बहुत आसान है, लेकिन फिल्म को बेचना उतना ही मुश्किल। क्योंकि बॉलीवुड में जब कोई बड़ा हीरो किसी फिल्म के साथ जुड़ता है तो उस फिल्म को आसानी से बड़ी निर्माता कंपनी का साथ मिल जाता है, वहीं नई फिल्मों और कलाकारों को काफी कठिनाइयां आती हैं। मैंने अपनी फिल्म के लिए कई लोगों से बात की, लेकिन सब यही सोच रहे थे कि इस फिल्म में कोई सुपरस्टार नहीं है। मैं खुशकिस्मत हूं जो मुझे फिल्म निर्माण कंपनी फॉक्स स्टार स्टूडियो का साथ मिला है और मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि भले ही हमारी फिल्म में कोई सुपरस्टार नहीं है, लेकिन इस फिल्म में काम करने वाले सभी कलाकार सुपर टैलेंटेड स्टार हैं।
टनकपुर पर ठनक गई
मिस टनकपुर में जितने भी कलाकार काम कर रहे हैं। उन सभी की आपस में अच्छी कैमेस्ट्री हो गई है। प्रमोशन के दौरान भी यह कैमेस्ट्री देखने को मिल रही थी। फिल्म में खास भूमिका निभा रहे रवि किशन का कहना है कि जब विनोद ने मुझे फिल्म के बारे में और फिल्म का नाम बताया था तो मैं उन पर भरोसा नहीं कर रहा था। क्योंकि एक तो वह नए निर्देशक हैं और ऊपर से इनकी फिल्म का नाम और विषय कुछ अलग था, लेकिन बाद में जब मैं फिल्म का हिस्सा बना तो मेरी सोच ही बदल गई। आज इस फिल्म के कारण मेरे और विनोद के संबंध खास हो गए हैं। गौरतलब है कि फिल्म की कहानी ग्रामीण परिवेश के एक युवक के बारे में है, जिस पर भैंस मिस टनकपुर के साथ दुष्कर्म का झूठा आरोप मढ़ दिया जाता है। इस आरोप के बदले पंचायत उस युवक को भैंस से शादी करने का फरमान जारी कर देती है।
ऋषिता बनीं गांव की गोरी
फिल्म मिस टनकपुर में सभी को अपने देसी अंदाज से हैरान कर देने वाली ऋषिता प्रमोशन के दौरान मॉडर्न लुक में नजर आईं। षिता का कहना है कि उन्होंने कभी भी गांव नहीं देखे थे, लेकिन इस फिल्म को करने के बाद उन्हें गांव के लाइव दर्शन हो गए। वहीं, संजय मिश्रा भी अपने देसी अंदाज में नजर आए। संजय पिछली बार दम लगा के हईशा में नजर आए थे।
उत्तराखंड से आई टनकपुर
फिल्म का नाम मिस टकनपुर कहां से आया। यह सवाल जब विनोद से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में रहने के कारण बार-बार मेरा वहां आना-जाना होता था। बस से जाने के दौरान बीच में टनकपुर आता था, इसलिए यह नाम मेरे जेहन में बसा हुआ था। फिर संयोग यह हुआ कि जब मैंने दूसरों को इस फिल्म का नाम बताया तो सभी एक अलग नाम पाकर हैरान हुए और इसी से बात बन गई।
कम पैसे में बड़ा सामान
फिल्म के बजट के बारे में विनोद का कहना है कि हमने एक ईमानदार फिल्म बनाई है। हमारी फिल्म में अच्छे और प्रतिभाशाली कलाकार हैं। कंटेंट में दम है और ट्रेलर का इस तरह से छा जाना यह साबित करता है कि अच्छा कटेंट और अच्छे कलाकार हों तो कम बजट में भी बेहतरीन फिल्म बनाई जा सकती है।
यूट्यूब पर भले ही विनोद कापड़ी की फिल्म मिस टनकपुर को अच्छा रिस्पॉन्स मिला हो, लेकिन फिल्म में किसी सुपरस्टार के न होने से विनोद को शुरुआती दिनों में काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। विनोद कापड़ी का कहना है कि बॉलीवुड में एक निर्माता-निर्देशक के लिए फिल्म बनाना तो बहुत आसान है, लेकिन फिल्म को बेचना उतना ही मुश्किल। क्योंकि बॉलीवुड में जब कोई बड़ा हीरो किसी फिल्म के साथ जुड़ता है तो उस फिल्म को आसानी से बड़ी निर्माता कंपनी का साथ मिल जाता है, वहीं नई फिल्मों और कलाकारों को काफी कठिनाइयां आती हैं। मैंने अपनी फिल्म के लिए कई लोगों से बात की, लेकिन सब यही सोच रहे थे कि इस फिल्म में कोई सुपरस्टार नहीं है। मैं खुशकिस्मत हूं जो मुझे फिल्म निर्माण कंपनी फॉक्स स्टार स्टूडियो का साथ मिला है और मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि भले ही हमारी फिल्म में कोई सुपरस्टार नहीं है, लेकिन इस फिल्म में काम करने वाले सभी कलाकार सुपर टैलेंटेड स्टार हैं।
टनकपुर पर ठनक गई
मिस टनकपुर में जितने भी कलाकार काम कर रहे हैं। उन सभी की आपस में अच्छी कैमेस्ट्री हो गई है। प्रमोशन के दौरान भी यह कैमेस्ट्री देखने को मिल रही थी। फिल्म में खास भूमिका निभा रहे रवि किशन का कहना है कि जब विनोद ने मुझे फिल्म के बारे में और फिल्म का नाम बताया था तो मैं उन पर भरोसा नहीं कर रहा था। क्योंकि एक तो वह नए निर्देशक हैं और ऊपर से इनकी फिल्म का नाम और विषय कुछ अलग था, लेकिन बाद में जब मैं फिल्म का हिस्सा बना तो मेरी सोच ही बदल गई। आज इस फिल्म के कारण मेरे और विनोद के संबंध खास हो गए हैं। गौरतलब है कि फिल्म की कहानी ग्रामीण परिवेश के एक युवक के बारे में है, जिस पर भैंस मिस टनकपुर के साथ दुष्कर्म का झूठा आरोप मढ़ दिया जाता है। इस आरोप के बदले पंचायत उस युवक को भैंस से शादी करने का फरमान जारी कर देती है।
ऋषिता बनीं गांव की गोरी
फिल्म मिस टनकपुर में सभी को अपने देसी अंदाज से हैरान कर देने वाली ऋषिता प्रमोशन के दौरान मॉडर्न लुक में नजर आईं। षिता का कहना है कि उन्होंने कभी भी गांव नहीं देखे थे, लेकिन इस फिल्म को करने के बाद उन्हें गांव के लाइव दर्शन हो गए। वहीं, संजय मिश्रा भी अपने देसी अंदाज में नजर आए। संजय पिछली बार दम लगा के हईशा में नजर आए थे।
उत्तराखंड से आई टनकपुर
फिल्म का नाम मिस टकनपुर कहां से आया। यह सवाल जब विनोद से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में रहने के कारण बार-बार मेरा वहां आना-जाना होता था। बस से जाने के दौरान बीच में टनकपुर आता था, इसलिए यह नाम मेरे जेहन में बसा हुआ था। फिर संयोग यह हुआ कि जब मैंने दूसरों को इस फिल्म का नाम बताया तो सभी एक अलग नाम पाकर हैरान हुए और इसी से बात बन गई।
कम पैसे में बड़ा सामान
फिल्म के बजट के बारे में विनोद का कहना है कि हमने एक ईमानदार फिल्म बनाई है। हमारी फिल्म में अच्छे और प्रतिभाशाली कलाकार हैं। कंटेंट में दम है और ट्रेलर का इस तरह से छा जाना यह साबित करता है कि अच्छा कटेंट और अच्छे कलाकार हों तो कम बजट में भी बेहतरीन फिल्म बनाई जा सकती है।
Friday, 26 June 2015
टनकपुर पर ठनक गई
मिस टनकपुर में जितने भी कलाकार काम कर रहे हैं। उन सभी की आपस में अच्छी कैमेस्ट्री हो गई है। प्रमोशन के दौरान भी यह कैमेस्ट्री देखने को मिल रही थी। फिल्म में खास भूमिका निभा रहे रवि किशन का कहना है कि जब विनोद ने मुझे फिल्म के बारे में और फिल्म का नाम बताया था तो मैं उन पर भरोसा नहीं कर रहा था। क्योंकि एक तो वह नए निर्देशक हैं और ऊपर से इनकी फिल्म का नाम और विषय कुछ अलग था, लेकिन बाद में जब मैं फिल्म का हिस्सा बना तो मेरी सोच ही बदल गई। आज इस फिल्म के कारण मेरे और विनोद के संबंध खास हो गए हैं। गौरतलब है कि फिल्म की कहानी ग्रामीण परिवेश के एक युवक के बारे में है, जिस पर भैंस मिस टनकपुर के साथ दुष्कर्म का झूठा आरोप मढ़ दिया जाता है। इस आरोप के बदले पंचायत उस युवक को भैंस से शादी करने का फरमान जारी कर देती है।
Monday, 15 June 2015
लाइम लाइट नहीं माधवन को चाहिए काम
पिछले दिनों तनु वेड्स मनु के प्रमोशन के दौरान आर माधवन से मिलने का मौका मिला। पहले ही अपेक्षा काफी वजनइदार हो गए हैं माधवन। पूछने पर पता चला कि अपनी अगली फिल्म के लिए तैयारी कर रहे हैं, इसलिए वजन बढ़ा रहे हैं। इस मुलाकात में बॉलीवुड इडस्ट्री, शादी और हीरोइनों को लेकर काफी बातें हुई। पेश है उस बातचीत के कुछ अंश।
फिल्म में आप दोनों ने एक शादीशुदा जोड़े का किरदार निभाया
है। क्या असल जिंदगी में शादी को लेकर आपका कोई नजरिया बदला है?
माधवन : मेरा नजरिया तो मेरी शादी के समय से ही बदला हुआ है। अब फिर नजरिया बदलकर मेरा कुछ नहीं हो सकता। हां मैं यह कह सकता हूं कि नजरिया कुछ हो। यदि खुशहाल शादीशुदा जिंदगी चाहिए तो मर्दों को हमेशा चुप रहना चाहिए। इसी में भलाई है।
फिल्म में कंगना का रोल ज्यादा है और इसमें वह लाइमलाइट
में रहती हैं। इससे क्या आपको फर्क पड़ता है?
माधवन : हां क्यों नहीं। यदि आप कह रही हैं कि क्या मुझे फिल्म साइन करते वक्त जलन हो रही थी तो जवाब है हां। मुझे जलन होती है कि मुझसे ज्यादा इस फिल्म में कंगना का काम सराहा जाता है। लेकिन असल में जब आप किसी फिल्म में काम करते हैं तो मायने यह नहीं रहता कि कौन क्या कर रहा है। मायने रखता है कि फिल्म की कहानी और फिल्म कितनी सफल है। यहां पर तो मुझे पता था कि यह फिल्म हमारे लिए कितनी महत्पवूर्ण है तो सोचने का सवाल ही पैदा नहीं होता। हमारी इस फिल्म का श्रेय कंगना को मिले या फिर आनंद को मिले या मुझे। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
माधवन : हां क्यों नहीं। यदि आप कह रही हैं कि क्या मुझे फिल्म साइन करते वक्त जलन हो रही थी तो जवाब है हां। मुझे जलन होती है कि मुझसे ज्यादा इस फिल्म में कंगना का काम सराहा जाता है। लेकिन असल में जब आप किसी फिल्म में काम करते हैं तो मायने यह नहीं रहता कि कौन क्या कर रहा है। मायने रखता है कि फिल्म की कहानी और फिल्म कितनी सफल है। यहां पर तो मुझे पता था कि यह फिल्म हमारे लिए कितनी महत्पवूर्ण है तो सोचने का सवाल ही पैदा नहीं होता। हमारी इस फिल्म का श्रेय कंगना को मिले या फिर आनंद को मिले या मुझे। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
बॉलीवुड में आपको सबसे ज्यादा किस बात ने परेशान किया?
माधवन : मैं खुद को भगवान का खास मानता हूं कि मुझे कभी कोई परेशानी नहीं हुई। मेरे लिए चीजें बनती गई और काम मिलता गया।
माधवन : मैं खुद को भगवान का खास मानता हूं कि मुझे कभी कोई परेशानी नहीं हुई। मेरे लिए चीजें बनती गई और काम मिलता गया।
फिल्म में जिस तरह तनु आप पर हावी रहती हैं। क्या असल
जिंदगी में आपको कभी ऐसी लड़की मिली है?
माधवन : हां कई बार देखी हैं। सिर्फ तनु ही नहीं मुझे लगता है कि ज्यादातर लड़कियों के सामने तेज से तेज लड़के भी मनु बन जाते हैं। फिर मेरी तो जब से मैंने तनु से शादी की है हालत खराब हो गई है। इस फिल्म में आपको यही देखने को मिलेगा कि कैसे शादी के चार साल बाद पत्नी के सितम सह-सहकर मेरी हालत खराब हो गई है, इसलिए मैंने पहली को छोड़कर दूसरी ढूंढने की कोशिश की। वैसे असल में मेरा खुद का यह मानना है कि बीवी जो कहे चुपचाप यह समझ के कर दो कि शादी के पहले मैं कौन सा रितिक रोशन था।
आप दोनों बाहर से आकर बॉलीवुड का हिस्सा बने हैं। कितनी मुश्किल होती है एक आउट साइडर को यहां जमने में?
माधवन : मैं तो यहां पर हीरो बनने आया ही नहीं था। मैं तो इजीनियर था, मैं यहां पढ़नेने आया था। एक दिन राह चलते किसी ने पूछ लिया कि टीवी शो करना है करोगे? तो मैंने उससे कहा कि कितने पैसे दोगे। वैसे मैं आज भी सबसे यही पूछ रहा हूं, लेकिन कोई मुंहमांगा देता नहीं है।
तमिल और हिंदी फिल्मों को कैसे मैनेज करते हैं?
माधवन : दोनों नहीं कर पाता, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि जब मैं हिंदी करता हूं तब तमिल भी करूं। इससे मैं दोनों में न्याय नहीं कर पाऊंगा। पहले सात सालों में मैंने 45 फिल्में की थीं और बाकी सात सालों में सिर्फ कुछ 6 फिल्में की थीं। इसलिए अब मैं जब तमिल करता हूं तो सिर्फ तमिल करता हूं और जब हिंदी तो सिर्फ हिंदी।
माधवन : हां कई बार देखी हैं। सिर्फ तनु ही नहीं मुझे लगता है कि ज्यादातर लड़कियों के सामने तेज से तेज लड़के भी मनु बन जाते हैं। फिर मेरी तो जब से मैंने तनु से शादी की है हालत खराब हो गई है। इस फिल्म में आपको यही देखने को मिलेगा कि कैसे शादी के चार साल बाद पत्नी के सितम सह-सहकर मेरी हालत खराब हो गई है, इसलिए मैंने पहली को छोड़कर दूसरी ढूंढने की कोशिश की। वैसे असल में मेरा खुद का यह मानना है कि बीवी जो कहे चुपचाप यह समझ के कर दो कि शादी के पहले मैं कौन सा रितिक रोशन था।
आप दोनों बाहर से आकर बॉलीवुड का हिस्सा बने हैं। कितनी मुश्किल होती है एक आउट साइडर को यहां जमने में?
माधवन : मैं तो यहां पर हीरो बनने आया ही नहीं था। मैं तो इजीनियर था, मैं यहां पढ़नेने आया था। एक दिन राह चलते किसी ने पूछ लिया कि टीवी शो करना है करोगे? तो मैंने उससे कहा कि कितने पैसे दोगे। वैसे मैं आज भी सबसे यही पूछ रहा हूं, लेकिन कोई मुंहमांगा देता नहीं है।
तमिल और हिंदी फिल्मों को कैसे मैनेज करते हैं?
माधवन : दोनों नहीं कर पाता, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि जब मैं हिंदी करता हूं तब तमिल भी करूं। इससे मैं दोनों में न्याय नहीं कर पाऊंगा। पहले सात सालों में मैंने 45 फिल्में की थीं और बाकी सात सालों में सिर्फ कुछ 6 फिल्में की थीं। इसलिए अब मैं जब तमिल करता हूं तो सिर्फ तमिल करता हूं और जब हिंदी तो सिर्फ हिंदी।
अमेरिका में भी इरफान का इम्तिहान
http://epaper.livehindustan.com/story.aspx?id=366367&boxid=58592612&ed_date=2015-6-16&ed_code=55&ed_page=6
इरफान खान की मशहूर हॉलीवुड फिल्म जुरासिक पार्क हाल ही में रिलीज हुई है और अब खबर है कि जल्द ही वह हॉलीवुड के एक टीवी शो में लीड किरदार निभाने जा रहे हैं। अपनी इस कामयाबी पर इरफान कहते हैं कि हर बार जिंदगी मेरा इम्तिहान ले रही है और मेरी खुशकिस्मती है कि मैं इन सभी में पास हो रहा हूं।
मुझे लगता है कि हम अपनी जिंदगी में इतना कचरा फैला देते हैं कि जब हम इसे साफ करते हैं तो जिदंगी को एक नया मोड़ मिल जाता है। यह कहना है लंबे सघर्ष के बाद सफल हुए अभिनेता इरफान खान का। इरफान की जिंदगी में अब ऐसा मोड़ आ गया है कि अब न सिर्फ वह बॉलीवुड के बल्कि हॉलीवुड में भी एक बड़ा नाम बन गए हैं। खबर है कि इरफान खान को अब एक इंटरनेशनल शो में साइन कर लिया गया है। चर्चा है कि वह बाफ्टा अवॉर्ड विनिंग शो ट्रू डिटेक्टिव के दूसरे सीजन में नजर आएंगे। पिछले सीजन में इस शो में लीड अभिनेता का किरदार निभाया था पॉपुलर स्टार मैथ्यू मेकोनघे ने। हॉलीवुड में तो इरफान का दबदबा बहुत पहले से है। वह द माइटी हार्ट, द नेमसेक, स्लमडॉग मिल्यनेर, द अमेजिंग स्पाइडरमैन, और द लाइफ ऑफ पाई जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं और अब तो इरफान की फिल्म जुरासिक वल्र्ड भी रिलीज हो गई है। इसमें उन्होंने जुरासिक वल्र्ड के मालिक साइमन मसरानी का किरदार निभाया है। अब तक बॉलीवुड के किसी भी एक्टर ने किसी हॉलीवुड फिल्म में इतना लंबा किरदार नहीं निभाया। इरफान ही इंडस्ट्री के एक ऐसे एक्टर हैं, जो किसी अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में बेहद अहम भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय निर्माताओं ने अब अपने लोकप्रिय शो टू्र डिटेक्टिव के लिए इरफान से सपंर्क किया है। कुछ ही दिन पहले लंचबॉक्स स्टार ने कहा था कि वह किसी ऐसे इंटरनेशनल शो का हिस्सा बनना चाहते हैं, जहां वह खुद को एक्सप्लोर कर सकें और अब उनकी यह ख्वाहिश भी पूरी हो गई है। इस बारे में बात करते हुए इरफान ने कहा, हाल ही में मैंने इस शो का पहला सीजन देखा और इसे देखकर मैं इसका फैन हो गया हूं। हालांकि इरफान ने यह खुलासा नहीं किया कि शो के निर्माताओं से उनकी बातचीत चल रही है। उन्होंने बस इतना कहा कि अगर मुझे इसमें काम करने का मौका मिलता है तो मैं इसमें खुशी-खुशी काम करूंगा। हालांकि अब देखना होगा कि अमेरिकन टीवी शो में काम करके इरफान अपने इस इम्तिहान में पास हो पाते हैं कि नहीं।
http://epaper.livehindustan.com/story.aspx?id=366367&boxid=58592612&ed_date=2015-6-16&ed_code=55&ed_page=6
इरफान खान की मशहूर हॉलीवुड फिल्म जुरासिक पार्क हाल ही में रिलीज हुई है और अब खबर है कि जल्द ही वह हॉलीवुड के एक टीवी शो में लीड किरदार निभाने जा रहे हैं। अपनी इस कामयाबी पर इरफान कहते हैं कि हर बार जिंदगी मेरा इम्तिहान ले रही है और मेरी खुशकिस्मती है कि मैं इन सभी में पास हो रहा हूं।
मुझे लगता है कि हम अपनी जिंदगी में इतना कचरा फैला देते हैं कि जब हम इसे साफ करते हैं तो जिदंगी को एक नया मोड़ मिल जाता है। यह कहना है लंबे सघर्ष के बाद सफल हुए अभिनेता इरफान खान का। इरफान की जिंदगी में अब ऐसा मोड़ आ गया है कि अब न सिर्फ वह बॉलीवुड के बल्कि हॉलीवुड में भी एक बड़ा नाम बन गए हैं। खबर है कि इरफान खान को अब एक इंटरनेशनल शो में साइन कर लिया गया है। चर्चा है कि वह बाफ्टा अवॉर्ड विनिंग शो ट्रू डिटेक्टिव के दूसरे सीजन में नजर आएंगे। पिछले सीजन में इस शो में लीड अभिनेता का किरदार निभाया था पॉपुलर स्टार मैथ्यू मेकोनघे ने। हॉलीवुड में तो इरफान का दबदबा बहुत पहले से है। वह द माइटी हार्ट, द नेमसेक, स्लमडॉग मिल्यनेर, द अमेजिंग स्पाइडरमैन, और द लाइफ ऑफ पाई जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं और अब तो इरफान की फिल्म जुरासिक वल्र्ड भी रिलीज हो गई है। इसमें उन्होंने जुरासिक वल्र्ड के मालिक साइमन मसरानी का किरदार निभाया है। अब तक बॉलीवुड के किसी भी एक्टर ने किसी हॉलीवुड फिल्म में इतना लंबा किरदार नहीं निभाया। इरफान ही इंडस्ट्री के एक ऐसे एक्टर हैं, जो किसी अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में बेहद अहम भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय निर्माताओं ने अब अपने लोकप्रिय शो टू्र डिटेक्टिव के लिए इरफान से सपंर्क किया है। कुछ ही दिन पहले लंचबॉक्स स्टार ने कहा था कि वह किसी ऐसे इंटरनेशनल शो का हिस्सा बनना चाहते हैं, जहां वह खुद को एक्सप्लोर कर सकें और अब उनकी यह ख्वाहिश भी पूरी हो गई है। इस बारे में बात करते हुए इरफान ने कहा, हाल ही में मैंने इस शो का पहला सीजन देखा और इसे देखकर मैं इसका फैन हो गया हूं। हालांकि इरफान ने यह खुलासा नहीं किया कि शो के निर्माताओं से उनकी बातचीत चल रही है। उन्होंने बस इतना कहा कि अगर मुझे इसमें काम करने का मौका मिलता है तो मैं इसमें खुशी-खुशी काम करूंगा। हालांकि अब देखना होगा कि अमेरिकन टीवी शो में काम करके इरफान अपने इस इम्तिहान में पास हो पाते हैं कि नहीं।
Sunday, 14 June 2015
जीवनसाथी की तलाश में कंगना
कंगना ने बताया कैसा जीवनसाथी चाहिए उन्हें
गुड़गांव, नीलम कोठारी बडोनी
फिल्म 'तनु वेड्स मनु' में तनु और मनु का
किरदार सभी को याद होगा, लेकिन कंगना का मानना है कि पर्दे पर भले ही उन्होंने तनु
का किरदार निभाया हो। पर असल जिंदगी में वह तेज तर्रार तनु नहीं सीधी-साधी मनु
जैसी हैं। इसलिए यदि उनकी शादी तनु जैसे तेज तर्रार लड़के से हुई तो उनकी शादी कभी
चल नहीं पाएगी।
साथ ही कंगना का कहना है कि फिल्म में शादी के
बाद उन्होंने अपने डॉक्टर साहब यानी माधवन पर इतने सितम किए कि वह परेशान हो गए।
पेश है कंगना और माधवन के साथ नीलम कोठारी बडोनी की बातचीत के अंश:
फिल्म में आप दोनों ने एक शादीशुदा जोड़े का किरदार निभाया है। क्या असल जिंदगी में शादी को लेकर आपका कोई नजरिया बदला है?
कंगना : अगर मैं इस फिल्म से प्रभावित होने लगी तो फिर सब बदल जाएगा। इस फिल्म में मैंने जिस तरह का किरदार निभाया है उससे कई लड़कियां खुद को जोड़ सकती हैं, लेकिन मैं असल जिंदगी में ऐसी नहीं हूं। असल में तो मैं मनु हूं जो किसी से कम बात करता है और शर्मीला है। मुझे यदि कोई तनु जैसा तेज तर्रार लड़का मिलेगा तो मेरी शादी कुछ दिन भी नहीं चल पाएगी। मुझे कोई मेरे ही जैसा शांत लड़का तलाश करना होगा।
फिल्म में आप दोनों ने एक शादीशुदा जोड़े का किरदार निभाया है। क्या असल जिंदगी में शादी को लेकर आपका कोई नजरिया बदला है?
कंगना : अगर मैं इस फिल्म से प्रभावित होने लगी तो फिर सब बदल जाएगा। इस फिल्म में मैंने जिस तरह का किरदार निभाया है उससे कई लड़कियां खुद को जोड़ सकती हैं, लेकिन मैं असल जिंदगी में ऐसी नहीं हूं। असल में तो मैं मनु हूं जो किसी से कम बात करता है और शर्मीला है। मुझे यदि कोई तनु जैसा तेज तर्रार लड़का मिलेगा तो मेरी शादी कुछ दिन भी नहीं चल पाएगी। मुझे कोई मेरे ही जैसा शांत लड़का तलाश करना होगा।
फिल्म में कंगना का रोल
ज्यादा है और इसमें वह लाइमलाइट में रहती हैं। इससे क्या आपको फर्क पड़ता है?
कंगना : आप पक्का
हमारी लड़ाई करवाने वाली हैं। आपका हमारी दोस्ती में दरार डालने का इरादा है।
बॉलीवुड में आपको सबसे
ज्यादा किस बात ने परेशान किया?
कंगना : मेरी कहानी बहुत लंबी
है, लेकिन मुझे यहां पर सबसे ज्यादा परेशानी कम्यूनिकेशन के कारण हुई। मेरी भाषा
उतनी अच्छी नहीं थी, इसलिए मैं दूसरों से बात भी नहीं कर पाती थी। दूसरा मुझे लगता
था कि मुझे उतना नॉलेज नहीं है जितना कि दूसरों को, इसलिए मैंने इस पर काम किया।
किताबें पढ़ीं और कोशिश की दूसरों के सामने खुद को प्रस्तुत करने की।
फिल्म
में जिस तरह तनु आप पर हावी रहती हैं। क्या असल जिंदगी में आपको कभी ऐसी लड़की मिली
है?
कंगना : इस फिल्म में आप कई ऐसे डायलॉग सुनेंगे जो आपको लगेगा कि मैं कैसे बोल रही हूं। मुझे खुद भी अपने डायलॉग पढ़ते हुए लगता था कि कैसे मैं यह डायलॉग बोलकर मनु का दिल दुखा रही हूं।
कंगना : इस फिल्म में आप कई ऐसे डायलॉग सुनेंगे जो आपको लगेगा कि मैं कैसे बोल रही हूं। मुझे खुद भी अपने डायलॉग पढ़ते हुए लगता था कि कैसे मैं यह डायलॉग बोलकर मनु का दिल दुखा रही हूं।
प
दोनों बाहर से आकर बॉलीवुड का हिस्सा बने हैं। कितनी मुश्किल होती है एक आउट साइडर
को यहां जमने में?
कंगना : मेरे साथ ऐसा नहीं रहा। मैं खुद को भाग्यशाली नहीं मानती हूं। मैंने हमेशा हर चीज में बहुत संघर्ष किया है। पिछले दस सालों में मैंने काफी कुछ सहा है। मैंने अपने संघर्ष को तीन हिस्सों में बांटा है। पहला है पर्सनल स्ट्रगल-जिसमें आता है कि आप किस तरह से एक्टिंग करते हैं। तो मेरे केस में मुझे एक्टिंग भी सीखनी पड़ी। दूसरा है मीडियम- इसमें मैंने कम्यूनिकेशन को रखा है और तीसरा है सोशल- मैं लोगों से ज्यादा घुलती मिलती नहीं हूं, इसलिए मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा।
कंगना : मेरे साथ ऐसा नहीं रहा। मैं खुद को भाग्यशाली नहीं मानती हूं। मैंने हमेशा हर चीज में बहुत संघर्ष किया है। पिछले दस सालों में मैंने काफी कुछ सहा है। मैंने अपने संघर्ष को तीन हिस्सों में बांटा है। पहला है पर्सनल स्ट्रगल-जिसमें आता है कि आप किस तरह से एक्टिंग करते हैं। तो मेरे केस में मुझे एक्टिंग भी सीखनी पड़ी। दूसरा है मीडियम- इसमें मैंने कम्यूनिकेशन को रखा है और तीसरा है सोशल- मैं लोगों से ज्यादा घुलती मिलती नहीं हूं, इसलिए मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा।
सरबजीत पर ओमंग से बातचीत
सरबजीत की कहानी में नहीं होंगी प्रियंका
http://www.livehindustan.com/news/entertainment/article1-priyanka-chopra-omang-kumar-film-sarabjeet-481525.html
नई दिल्ली, नीलम कोठारी बडोनी
प्रियंका चोपड़ा ने ओमंग कुमार के साथ जब से मैरी कॉम की, तब से दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई है, इसलिए जब ओमंग ने अपनी अगली बायोपिक ‘सरबजीत’ की घोषणा की तो लोगों ने इसमें प्रियंका का नाम जोड़ दिया। लेकिन खुद ओमंग ने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि पिछली स्क्रिप्ट पसंद न आने के कारण वह दोबारा स्क्रिप्ट लिख रहे हैं और उन्होंने पीसी से इस बारे में कोई बात नहीं की है।
पिछले कुछ दिनों से ओमंग कुमार की फिल्म ‘सरबजीत’ और प्रियंका बॉलीवुड गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं, क्योंकि प्रियंका के बारे में खबर थी कि वह इस फिल्म में सरबजीत की बहन दलबीर कौर बनकर सरबजीत की कहानी से लोगों को रू-ब-रू कराएंगी, लेकिन ओमंग ने इस खबर का खंडन किया है। उनका कहना है कि न ही उन्होंने इस फिल्म के लिए प्रियंका से बात की और न ही कंगना ने उनका प्रस्ताव ठुकराया।
ओमंग ने कहा कि अभी तक तो मैंने सोचा ही नहीं है कि सरबजीत की इस बायोपिक में कौन अभिनेत्री होगी, फिर बात करना तो दूर की बात है। मैं मानता हूं कि प्रियंका एक अच्छी अभिनेत्री हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उनके अलावा मैं कभी किसी के साथ काम नहीं करूंगा। मैं दोबारा फिल्म की पूरी कहानी लिख रहा हूं, मैं और दलबीर पिछले कई दिनों से इस पर काम कर रहे हैं। हम दोनों पूरा टाइम साथ में हैं। इसकी कहानी लिखने के बाद ही मैं यह फैसला करूंगा कि किस अभिनेत्री पर दलबीर का किरदार फबेगा। यह पूरी कहानी दलबीर की है, इसलिए हमें एक ऐसी अभिनेत्री की जरूरत है जो दर्शकों को सरबजीत के साथ-साथ उसके दर्द और उसके परिवार के दर्द से जोड़ सके।
गीली हो रही हैं आंखें
ओमंग का कहना है कि जब मैं दलबीर से मिला और उन्होंने मुझे सरबजीत और अपने परिवार की कहानी सुनाई तो मैं रोने लगा, इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं दलबीर से पूरा ब्यौरा सुनने के बाद ही कहानी लिखूंगा। जिससे कि मैं वह दर्द और भावनाएं स्क्रिप्ट में डाल सकूं जो मैंने महसूस की हैं। मैं फिल्म में दिखाऊंगा कि कैसे बने सरबजीत, कैसे उनके परिवार ने महसूस किया, उन्होंने क्या पहना था जब उन्हें सजा हुई और कैसे उनका जेल का सफर रहा। उनकी जिदंगी के हर पहलू को मुझे फिल्माना है। हालांकि मेरे सामने कई चुनौतियां भी हैं।
सरकारी झमेला
ओमंग का कहना है कि मैं इस फिल्म को प्रोड्यूस कर रहा हूं, लेकिन मैं इस कहानी में इतना खो गया हूं कि समझ नहीं पा रहा कि शूटिंग पाकिस्तान में करूं कि पंजाब में। इसके साथ ही मुझे यह भी ध्यान रखना होगा कि इसमें मैं कुछ ऐसा न दिखाऊं जो लोगों को भड़का दे, क्योंकि इससे भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। इसलिए मैं बड़ी सावधानी से कहानी लिख रहा हूं। साथ ही यह भी चुनौती है कि फिल्म में किसी की नकारात्मक छवि न बने। गौरतलब है कि सरबजीत ने 2013 में दुनिया को अलविदा कह दिया था। वह पाकिस्तान की जेल में उस जुर्म की सजा काट रहे थे जो उन्होंने किया ही नहीं था। सरबजीत की बहन दलबीर ने ही उन्हें भारत वापस लाने की मुहिम शुरू की थी। उन्होंने सरबजीत की रिहाई के लिए उनकी आखिरी सांस तक जंग लड़ी थी।
अफवाहों से बाजार गर्म
जब से इस फिल्म की बनने की बात हुई है तब से इस फिल्म के साथ न सिर्फ प्रियंका चोपड़ा का बल्कि कंगना से लेकर सोनाक्षी और भी कई अभिनेत्रियों का नाम जुड़ा है। सुनने में आ रहा था कि सोना और कंगना दोनों ने ही सरबजीत के जीवन पर बन रही बायोपिक में काम करने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन ओमंग ने इन सभी को साफ कह दिया कि इस फिल्म के लिए हीरोइन वही होगी जो पंजाबी लुक में ढल जाए और स्क्रिप्ट के हिसाब से फिट हो।
पिछले कुछ दिनों से ओमंग कुमार की फिल्म ‘सरबजीत’ और प्रियंका बॉलीवुड गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं, क्योंकि प्रियंका के बारे में खबर थी कि वह इस फिल्म में सरबजीत की बहन दलबीर कौर बनकर सरबजीत की कहानी से लोगों को रू-ब-रू कराएंगी, लेकिन ओमंग ने इस खबर का खंडन किया है। उनका कहना है कि न ही उन्होंने इस फिल्म के लिए प्रियंका से बात की और न ही कंगना ने उनका प्रस्ताव ठुकराया।
ओमंग ने कहा कि अभी तक तो मैंने सोचा ही नहीं है कि सरबजीत की इस बायोपिक में कौन अभिनेत्री होगी, फिर बात करना तो दूर की बात है। मैं मानता हूं कि प्रियंका एक अच्छी अभिनेत्री हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उनके अलावा मैं कभी किसी के साथ काम नहीं करूंगा। मैं दोबारा फिल्म की पूरी कहानी लिख रहा हूं, मैं और दलबीर पिछले कई दिनों से इस पर काम कर रहे हैं। हम दोनों पूरा टाइम साथ में हैं। इसकी कहानी लिखने के बाद ही मैं यह फैसला करूंगा कि किस अभिनेत्री पर दलबीर का किरदार फबेगा। यह पूरी कहानी दलबीर की है, इसलिए हमें एक ऐसी अभिनेत्री की जरूरत है जो दर्शकों को सरबजीत के साथ-साथ उसके दर्द और उसके परिवार के दर्द से जोड़ सके।
गीली हो रही हैं आंखें
ओमंग का कहना है कि जब मैं दलबीर से मिला और उन्होंने मुझे सरबजीत और अपने परिवार की कहानी सुनाई तो मैं रोने लगा, इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं दलबीर से पूरा ब्यौरा सुनने के बाद ही कहानी लिखूंगा। जिससे कि मैं वह दर्द और भावनाएं स्क्रिप्ट में डाल सकूं जो मैंने महसूस की हैं। मैं फिल्म में दिखाऊंगा कि कैसे बने सरबजीत, कैसे उनके परिवार ने महसूस किया, उन्होंने क्या पहना था जब उन्हें सजा हुई और कैसे उनका जेल का सफर रहा। उनकी जिदंगी के हर पहलू को मुझे फिल्माना है। हालांकि मेरे सामने कई चुनौतियां भी हैं।
सरकारी झमेला
ओमंग का कहना है कि मैं इस फिल्म को प्रोड्यूस कर रहा हूं, लेकिन मैं इस कहानी में इतना खो गया हूं कि समझ नहीं पा रहा कि शूटिंग पाकिस्तान में करूं कि पंजाब में। इसके साथ ही मुझे यह भी ध्यान रखना होगा कि इसमें मैं कुछ ऐसा न दिखाऊं जो लोगों को भड़का दे, क्योंकि इससे भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। इसलिए मैं बड़ी सावधानी से कहानी लिख रहा हूं। साथ ही यह भी चुनौती है कि फिल्म में किसी की नकारात्मक छवि न बने। गौरतलब है कि सरबजीत ने 2013 में दुनिया को अलविदा कह दिया था। वह पाकिस्तान की जेल में उस जुर्म की सजा काट रहे थे जो उन्होंने किया ही नहीं था। सरबजीत की बहन दलबीर ने ही उन्हें भारत वापस लाने की मुहिम शुरू की थी। उन्होंने सरबजीत की रिहाई के लिए उनकी आखिरी सांस तक जंग लड़ी थी।
अफवाहों से बाजार गर्म
जब से इस फिल्म की बनने की बात हुई है तब से इस फिल्म के साथ न सिर्फ प्रियंका चोपड़ा का बल्कि कंगना से लेकर सोनाक्षी और भी कई अभिनेत्रियों का नाम जुड़ा है। सुनने में आ रहा था कि सोना और कंगना दोनों ने ही सरबजीत के जीवन पर बन रही बायोपिक में काम करने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन ओमंग ने इन सभी को साफ कह दिया कि इस फिल्म के लिए हीरोइन वही होगी जो पंजाबी लुक में ढल जाए और स्क्रिप्ट के हिसाब से फिट हो।
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