Sunday, 14 June 2015

जीवनसाथी की तलाश में कंगना

कंगना ने बताया कैसा जीवनसाथी चाहिए उन्हें
गुड़गांव, नीलम कोठारी बडोनी
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फिल्म 'तनु वेड्स मनु' में तनु और मनु का किरदार सभी को याद होगा, लेकिन कंगना का मानना है कि पर्दे पर भले ही उन्होंने तनु का किरदार निभाया हो। पर असल जिंदगी में वह तेज तर्रार तनु नहीं सीधी-साधी मनु जैसी हैं। इसलिए यदि उनकी शादी तनु जैसे तेज तर्रार लड़के से हुई तो उनकी शादी कभी चल नहीं पाएगी।
साथ ही कंगना का कहना है कि फिल्म में शादी के बाद उन्होंने अपने डॉक्टर साहब यानी माधवन पर इतने सितम किए कि वह परेशान हो गए। पेश है कंगना और माधवन के साथ नीलम कोठारी बडोनी की बातचीत के अंश:

फिल्म में आप दोनों ने एक शादीशुदा जोड़े का किरदार निभाया है। क्या असल जिंदगी में शादी को लेकर आपका कोई नजरिया बदला है?
कंगना : अगर मैं इस फिल्म से प्रभावित होने लगी तो फिर सब बदल जाएगा। इस फिल्म में मैंने जिस तरह का किरदार निभाया है उससे कई लड़कियां खुद को जोड़ सकती हैं, लेकिन मैं असल जिंदगी में ऐसी नहीं हूं। असल में तो मैं मनु हूं जो किसी से कम बात करता है और शर्मीला है। मुझे यदि कोई तनु जैसा तेज तर्रार लड़का मिलेगा तो मेरी शादी कुछ दिन भी नहीं चल पाएगी। मुझे कोई मेरे ही जैसा शांत लड़का तलाश करना होगा। 
फिल्म में कंगना का रोल ज्यादा है और इसमें वह लाइमलाइट में रहती हैं। इससे क्या आपको फर्क पड़ता है?
कंगना : आप पक्का हमारी लड़ाई करवाने वाली हैं। आपका हमारी दोस्ती में दरार डालने का इरादा है।
बॉलीवुड में आपको सबसे ज्यादा किस बात ने परेशान किया?
कंगना : मेरी कहानी बहुत लंबी है, लेकिन मुझे यहां पर सबसे ज्यादा परेशानी कम्यूनिकेशन के कारण हुई। मेरी भाषा उतनी अच्छी नहीं थी, इसलिए मैं दूसरों से बात भी नहीं कर पाती थी। दूसरा मुझे लगता था कि मुझे उतना नॉलेज नहीं है जितना कि दूसरों को, इसलिए मैंने इस पर काम किया। किताबें पढ़ीं और कोशिश की दूसरों के सामने खुद को प्रस्तुत करने की। 
फिल्म में जिस तरह तनु आप पर हावी रहती हैं। क्या असल जिंदगी में आपको कभी ऐसी लड़की मिली है?
कंगना : इस फिल्म में आप कई ऐसे डायलॉग सुनेंगे जो आपको लगेगा कि मैं कैसे बोल रही हूं। मुझे खुद भी अपने डायलॉग पढ़ते हुए लगता था कि कैसे मैं यह डायलॉग बोलकर मनु का दिल दुखा रही हूं। 
प दोनों बाहर से आकर बॉलीवुड का हिस्सा बने हैं। कितनी मुश्किल होती है एक आउट साइडर को यहां जमने में?

कंगना : मेरे साथ ऐसा नहीं रहा। मैं खुद को भाग्यशाली नहीं मानती हूं। मैंने हमेशा हर चीज में बहुत संघर्ष किया है। पिछले दस सालों में मैंने काफी कुछ सहा है। मैंने अपने संघर्ष को तीन हिस्सों में बांटा है। पहला है पर्सनल स्ट्रगल-जिसमें आता है कि आप किस तरह से एक्टिंग करते हैं। तो मेरे केस में मुझे एक्टिंग भी सीखनी पड़ी। दूसरा है मीडियम- इसमें मैंने कम्यूनिकेशन को रखा है और तीसरा है सोशल- मैं लोगों से ज्यादा घुलती मिलती नहीं हूं, इसलिए मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा।

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