महेश भट्ट को आज के सिनेमा का सबसे उदारवादी और संगर्ष शील फ़िल्मकार माना जाता है। कुछ समय पहले हिंदुस्तान के दफ्तर मे जज उनसे मिली तो उनका उदारपन भी देखा, लेकिन उनके एक इंटरव्यू ने मेरे मन मैं उनकी बसी तस्वीर को भर्मित कर दिया। अपने जीवन के उतार चढ़ाव मैं महेश अपनी बेटियों को तो अपने पास पाते हैं पर अपने बेटे राहुल को अभी भी खुद से दूर रखने का पछतावा है उन्हें। उनका कहना है कि राहुल के साथ मैंने ज्यादा बचपन नहीं गुजारा है। मैं घर से अलग हो गया था। वह मुझे बहुत याद करता था और शायद मुझसे गुस्सा भी था। जाहिर है अगर बाप उसकी मां को छोड़ कर किसी और औरत के साथ रहेगा तो उसे गुस्सा आएगा।मैंने भी उस वक़्त उसके दर्द को नजरअंदाज किया। और बाद मैं उस दर्द से उसे भर निकलने मैं मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी। ‘पाप’ की शूटिंग के दौरान हम बाप-बेटे एक कमरे में डेढ़ महीने ठहरे तो रिश्ता कायम हुआ। मैंने बताया भी कि मुझे अपने पिता से जो शिकायत थी,वही मैंने तुम्हारे साथ कर दिया।मुझे उस बात का बहुत पछतावा है,क्योंकि जो मुझ पर गुजरी थी वह मेरे बेटे पर नही गुजरनी चाहिए थी।

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